✴️मेरठ : ज्यादातर हम सभी के घर में किचन से रोज ही बड़ी मात्रा में कचरा या कूड़ा-करकट निकलता है।घर से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े पर ध्यान दें तो सिर्फ १० प्रतिशत ही कचरा फेकने लायक होता हैं। घर की रसोई से निकलने वाला कचरा भी पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रहा। इसके उचित इस्तेमाल के बारे में सोचे बिना बहुत से लोग कचरे को घर से बाहर फेंक देते हैं। यह कचरा जब सड़ता है तो कई प्रकार के विषाणु उत्पन्न होते है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि थोड़ी सी जानकारी हासिल करके, आप किचन वेस्ट, यानी रसोई से निकलने वाले कचरे का बिल्कुल सही इस्तेमाल कर प्राकृतिक खाद तैयार कर सकते हैं। भारत में प्रतिदिन शहरी क्षेत्रों में एक व्यक्ति लगभग 700 ग्राम ठोस कचरा फैंक देता है यानि की एक साल में लगभग 250 किलो। लेकिन अब जागरुक होने की जरुरत है। जी हां… किचन वेस्ट को सिर्फ कचरा न समझें, बल्कि इससे आप अपने पौधों के लिए बिना किसी खर्च के घर पर आसानी से जैविक खाद तैयार कर सकते हैं। बस जरूरत है तो आपको यह जानने की, कि किचन वेस्ट से कैसे खाद बनाएं। तो आइए आज शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला महाविद्यालय के जनतुविज्ञान विभाग मे असिटेंट प्रोफेसर डॉ कुमकुम राजपूत इस आर्टिकल द्वारा बताती हैं कि रसोई के कचरे से आप घर पर ही प्राकृतिक खाद कैसे तैयार कर सकते हैं। मै अपने घर पर किचन वेस्ट से निकलने वाले कचरे से खाद बनाती हूं।
असि प्रोफेसर जंतुविज्ञान विभाग
आइए सबसे पहले जानते है की किचन वेस्ट कंपोस्टिंग क्या है?
किचन वेस्ट कंपोस्टिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें रसोई के कचरे और फूड स्क्रैप को जैविक रूप से विघटित किया जाता है। रसोई के कचरे में कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जिनका इस्तेमाल मिट्टी के लिए और घर पर पौधों और फसलों को उगाने के लिए खाद बनाने में किया जाता है।सभी के घर में कुछ ना कुछ कचरे के रूप में निकलता है, जैसे सब्जियों के छिलके, कागज़ के टुकड़े, यह सब कचरे के रूप में हम घर से बाहर फेक देते हैं।अगर आप थोड़ा ध्यान दे तो इन सब से आप अपने पौधों के लिए बहुत बढ़िया खाद बना सकते है। क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ नहीं होता है यह हमारे मिटटी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
रसोई के कचरे से खाद बनाने का आसान तरीका –
अब आपको यह सीखना है कि किचन वेस्ट से खाद को कैसे बनाया जाता है। इन विधियों द्वारा, घर पर किचन वेस्ट कंपोस्ट बना सकते है।
सबसे पहले, हरा और सूखा किचन वेस्ट इकट्ठा करें ।
सबसे पहले जैविक खाद का निर्माण करने के लिए किचन के कचरे से नाइट्रोजन युक्त (हरी सामग्री) और कार्बन युक्त (सूखी सामग्री) अपशिष्ट सामग्री चुनें। नाइट्रोजन युक्त हरी वस्तुओं में केले के छिलके, बची हुई सब्जियां और फलों के छिलके आदि शामिल हैं। दूसरी ओर,कार्बन युक्त सूखी सामग्री जैसे- लकड़ी का चूरा, लकड़ी के चिप्स, सूखे पत्ते, कोकोपीट , कटा हुआ कागज, कार्डबोर्ड या घास के तिनके हो सकते हैं।
. कम्पोस्ट बनाने के लिए एकत्रित की गई सामग्री को छोटे-छोटे टुकड़ों में कर लेते है। इससे खाद बनाने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे मिट्टी को टूटना और उनके पोषक तत्वों को अवशोषित करना आसान हो जाता है।
एक बार जब आप किचिन से निकले हरे कचड़े और सूखे अपशिष्ट मिश्रण को तैयार कर लेते हैं, , यदि आपके पास खुला स्थान है तो आप गड्ढे विधि द्वारा जैविक खाद बना सकते है।इसके लिए आपक लगभग 14 इंच गहरा गड्ढा खोदना होगा। गड्ढे में पहले चारो तरफ पानी का छिड़काव कर उसे नम कर ले और उसमे पत्ते, रसोई व घर का अन्य गलने योग्य कचरा, हरे और भूरे रंग की अपशिष्ट सामग्री को पूरी तरह से गड्ढे में दबा दे। कार्बन युक्त पदार्थों से पहले नाइट्रोजन युक्त (हरे) पदार्थों को पहले गड्ढे में डालना चाहिए, क्योंकि यह पोषक तत्वों को तेजी से टूटने में मदद करता है। गड्ढे को ३० सेंटीमीटर उचाई तक भर दे। इस पर एक तेह गोबर की बिछा दें। इसके बाद पुनः पानी का छिडकाव करके कूड़ा कचरा पत्ते आदि भर दे।
इस प्रकार गड्ढे को भरकर मिट्टी से अच्छी तरह बंद कर दे और समय समय पर पानी डालते रहे। इस प्रक्रिया से तीन चार महीने में आपके पौधों के लिए पोषक तत्वों से भरपूर कम्पोस्ट तैयार हो जाएगी और घर के कूड़े कचरे का सदुपयोग भी हों जाएगा।
यह मिट्टी के मटको या मिट्टी के बड़े गमलों में अपने रसोई से निकलने वाले कचरे को प्रतिदिन डालिए। कचरे को डालने से पहले मिट्टी के मटके में नीचे की ओर छेद कर ले, फिर उसमे अखबार बिछाये, उस पर सूखे पत्ते डाले। पत्तों पर कचरा बिछाना शुरू कर दे। कचरे के उपर फिर से पत्ते बिछा दें। इस विधि से हम रसोईघर के कूड़े करकट से खाद बना सकते है। यदि सूखे पत्ते न हो तो मिट्टी के गमलों में लकड़ी या फिर नारियल का बुरादा डालकर भी खाद को बनाया जा सकता है। खाद बनाने की प्रक्रिया तेजी से करने के लिए इसमें 2 किलो कचरे में लगभग 20 ग्राम गुड़ का पानी में घोल व 20-30ग्राम दही को एक कटोरी पानी में घोल कर डाल दे। जिससे कचरे के अपघटन की प्रक्रिया तेज़ी से हो सके। इस प्रकार रसोई से निकलने वाले कचरे का सदुपयोग किया जा सकता है। 1 महीने के बाद सुखा खाद बनना अपने आप शुरू हो जायेगा। जो दिखने में गाढ़ा भूरा और काला सा होता है।
अगर आप गड्ढे में खाद बनाना नहीं चाहते हैं, तो आप कचरे की मात्रा के अनुसार खाद बनाने के लिए किसी बड़े और गहरे कंटेनर( कम्पोस्ट बिन) का इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रहे अपशिष्ट कचड़े से खाद बनाने के लिए मिश्रण में नमी और ऑक्सीजन का प्रवाह अच्छी तरह से बना रहे। ऑक्सीजन प्रवाह के लिए कंटेनर में 5 -6 छिद्र होने चाहिए।
* कम्पोस्ट बिन के नीचले भाग में थोड़ी सी मिटटी बिछा दें। उसके बाद गीले कचरे और सूखे कचरे को एक के ऊपर एक थोड़े-थोड़े परतों में उस पात्र में डालते जाएँ।
* जब वह पात्र दोनों प्रकार सूखे और गीले कचरे के परतों से भर जाये तो उसे एक प्लास्टिक या लकड़ी के फट्टे से ढक दें। ढकने से पात्र के अंदर नमी बनी रहती है।
* पानी में दही मिला कर,हल्का हल्का छिडकाव करें और दोबारा प्लास्टिक को ढक दें।
* 25 से-30 दिन के बाद सुखा खाद बनना अपने आप शुरू हो जायेगा। जो दिखने में गाढ़ा भूरा और काला सा होता है और मिटटी की खुशबु उसमें होती है।
कम्पोस्ट बनाने के लिए कूड़ेदान में क्या ना डालें?
* रसोई घर के गीले कचरे जैसे बची खुची सब्जियां, खाना का बचा हुआ कचरे को अलग कूड़ेदान में रखें।
सभी प्रकार का ताजा मांस, डेयरी उत्पाद (जैसे, दूध, दही, पनीर, आदि), खाना पकाने के तेल, तैलीय उत्पाद, टिशू पेपर या कोई अन्य पेपर उत्पाद, जिनमें तेल होता, टहनिया, मछली उत्पाद, इत्यादि।
उपरोक्त चीजों से खाद नहीं बनाया जाता है। इन्हें गड्ढे में डालने से तेज दुर्गंध आ सकती है।
किचन वेस्ट से बनी खाद से क्या क्या फायदे हैं। –
यदि आप किचन वेस्ट कम्पोस्ट का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे निम्न तरह के लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं, जैसे:
किचन वेस्ट खाद मिट्टी की उर्वरता में सुधार बढ़ाती हैं और पौधों को संभावित बीमारियां होने से रोकती है।
पौधों के लिए पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी की बहुत आश्यकता होती हैं, यहां की मिट्टी में पोटाश और फास्फेट अच्छी मात्रा में मिल जाती है, परन्तु पौधों की वृद्धि व विकास के लिए आवश्यक तत्व नाइट्रोजन कम होता है, और नाइट्रोजन उसे कम्पोस्ट द्वारा संतुलित रूप में उपलब्ध होता है, इस प्रकार हम किचन वेस्ट से कम्पोस्ट तैयार करके पौधों को अत्यंत संतुलित पोषक तत्व प्रदान कर सकते है।
थोड़ी सी जानकारी से आप अपने पौधों के लिए किचन वेस्ट या रसोई के कचरे से खाद बना सकते हैं। इससे न केवल आपके पौधों की मिट्टी उपजाऊ बनेगी, बल्कि पौधों को भी पर्याप्त पोषक तत्व मिलेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि किचन वेस्ट से खाद बनाने में कोई लागत नहीं आती है। तो अब आप अपने रसोई घर के कचरे का सूझबूझ से इस्तेमाल करें।
डॉ. कुमकुम राजपूत
असि प्रोफेसर जंतुविज्ञान विभाग
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