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प्रधानमंत्री बीमा सखी योजना में भर्ती प्रारंभ

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29 मई 2021

 
👉यूपी के सभी आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में 30 जून तक नहीं बनेंगे लर्निंग डीएल
लखनऊ परिवहन विभाग ने राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के सभी आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने पर 30 जून तक रोक लगा दी है। प्रदेश के आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों द्वारा गत 23 अप्रैल से जारी किए गए लर्निंग डीएल के सभी टाइम स्लॉट रद्द कर दिए गए हैं।
परिवहन आयुक्त धीरज साहू के आदेश के बाद अब पूरे प्रदेश के आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में 30 जून तक लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन सकेंगे। परिवहन विभाग ने गत 23 अप्रैल से लर्निंग डीएल के लिए टाइम स्लॉट जारी किया था। कोरोना कर्फ्यू के कारण जिन आवेदकों को 30 जून तक का टाइम स्लॉट मिला था उसे परिवहन विभाग ने रद्द कर दिया है। ऐसे लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदकों को अब दोबारा टाइम स्लॉट लेना पड़ेगा। राजधानी लखनऊ में लर्निंग डीएल के आवेदकों की संख्या करीब 20 हजार तो प्रदेश में तकरीबन 03 लाख है। 
लर्निंग डीएल के आवेदकों को दोबारा टाइम स्लॉट लेने पर नहीं देनी होगी फीस
लखनऊ के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) अखिलेश कुमार द्विवेदी ने शुक्रवार को बताया कि जिन आवेदकों के लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के टाइम स्लॉट निरस्त किए गये हैं। वे जब दोबारा टाइम स्लॉट अपॉइंटमेंट के लिए आवेदन करेंगे तो उनको फीस का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। ऐसे आवेदकों की पूर्व में जमा की गई फीस नए टाइम स्लॉट में समायोजित की जाएगी।
प्रदेश में 31 मई से शुरू होगी स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया
परिवहन आयुक्त ने प्रदेश के सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों को आदेश दिया है कि स्थाई (परमानेंट) ड्राइविंग लाइसेंस के बनाने की प्रक्रिया 31 मई से शुरू की जाए। पूर्व में जिन आवेदकों ने अप्रैल से लेकर मई तक स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए टाइम स्लॉट लिया था उसे अब रीशेड्यूल करके आवेदकों के मोबाइल पर मैसेज भेजा जाएगा। जिन आवेदकों के मोबाइल पर मैसेज आएगा उन्हें ही स्थाई लाइसेंस बनवाने के लिए  आरटीओ और एआरटीओ कार्यालय जाना होगा।

👉हरदोई : यूपी के हरदोई जिले में संडीला से भाजपा विधायक राजकुमार अग्रवाल का बेटा कोरोना से संक्रमित था। जिसकी 26 अप्रैल को काकोरी के अथर्व अस्पताल में मौत हो गई थी। विधायक का कहना है कि बेटे की मौत अस्पताल की लापरवाही से हुई है। अस्पताल केस दर्ज कराने के लिए एक माह से थाने और अफसरों के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने CM से लेकर स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत की। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
विधायक राजकुमार अग्रवाल के 30 वर्षीय बेटे को कोरोना से संकर्मित हुआ था। 22 अप्रैल को उसे लखनऊ में काकोरी के अथर्व अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 26 अप्रैल को सुबह बेटे का ऑक्सीजन लेवल 94 था। वह खाना खा रहा था और सबसे बातचीत कर रहा था। शाम को अचानक डॉक्टरों ने बताया कि उसका ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है। इस पर उनके दो अन्य बेटे बाहर से ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर आए तो डॉक्टरों ने यह ऑक्सीजन मरीज तक नहीं पहुंचने दिया। काफी सिफारिश के बाद भी ऑक्सीजन नहीं लिया गया और थोड़ी देर बाद बेटे आशीष की मौत हो गई।
CM से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक लगाई गुहार
विधायक राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही से बेटे की जान चली गई। किसी और के साथ ऐसा न हो इसलिए अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज करवाने के लिए काकोरी थाने में तहरीर दिया। लेकिन पुलिस ने CMO की जांच के बिना रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया। उनका कहना है कि इस संबंध में CM योगी आदित्यनाथ से लेकर चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन 26 अप्रैल को दी गई तहरीर पर अभी तक केस दर्ज नहीं किया गया। इस बीच डीजीपी से लेकर पुलिस कमिश्नर तक से बात किया लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
पुराने थानेदार ने तहरीर ही नहीं दी
आप को बता दें कि इंस्पेक्टर काकोरी बृजेश सिंह का कहना है कि तीन दिन पहले ही चार्ज संभाला है। पुराने थानेदार ने विधायक की तहरीर उन्हें नहीं दी है। दूसरी तहरीर लेकर केस दर्ज किया जाएगा।



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