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प्रधानमंत्री बीमा सखी योजना में भर्ती प्रारंभ

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10 सितम्बर 2021

✴️कासगंज : निर्झर साहित्यिक संस्था, कासगंज द्वारा आधुनिक हिन्दी खडी़ बोली के जनक 'भारतेन्दु हरिश्चन्द्र' की जयन्ती के अवसर पर "हिन्दी-- कल आज और कल" विषय पर केन्द्रित एक आनलाइन वार्ता आयोजित की । 
जिसकी अध्यक्षता डा० सुभाष चन्द्र दीक्षित ने की, वहीं मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' जबलपुर (मध्य प्रदेश) , विशिष्ट अतिथि डा० राधा कृष्ण दीक्षित, हिन्दी विभागाध्यक्ष, के.ए. पी.जी कालेज, कासगंज, संचालक  डा० अखिलेश चन्द्र गौड़, निर्झर के सचिव अखिलेश सक्सेना, मनोज शर्मा "शलभ", पारुल बंसल, देवेन्द्र शर्मा " भ्रमर" आदि ने आनलाइन जुड़कर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के प्रारम्भ में डा० अखिलेश चन्द्र गौड़ ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर, दीप प्रज्ज्वलित किया, तदोपरांत अखिलेश सक्सेना द्वारा अतिथियों का परिचय दिया गया, तत्पश्चात डा० गौड़ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का विधिवत् शुभारंभ किया।  प्रथम वक्ता के रूप में पारुल बंसल ने कहा, भारत में अंग्रेजी के प्रयोग से बहुत पहले हिन्दी में "पृथ्वी राज रासो" जैसे श्रेष्ठ ग्रंथों का सृजन हुआ, वर्तमान में हिन्दी अपने बेहतर रूप में प्रचलित है, इसका भविष्य निश्चित रूप से उज्जवल है" अखिलेश सक्सेना ने कहा, "भारतेन्दु हरिश्चन्द्र से पूर्व हिन्दी की अवश्य दुर्दशा रही, लेकिन उनके अदम्य प्रयासों से हिन्दी उत्तरोत्तर विकास के आयाम तय करती हुई, वर्तमान में अपने यशस्वी रूप में पहचानी- स्वीकार जाती है, हिन्दी के उज्जवल भविष्य को लेकर पूरी तरह से आशान्वित हुआ जा सकता है।  "इसी क्रम में डा0 राधा कृष्ण दीक्षित ने बहुत विस्तार और वैदुष्य से अपने विचार प्रस्तुत किए, आपका कहना था कि भाषा अपनी यात्रा करती है, सांस्कृतिक, सामाजिक मूल्यों को अपने में पिरोती है, वर्तमान की हिन्दी और अधिक प्रामाणिकता और स्वीकार्यता से प्रभावी हो सकती है, यदि उसे कामकाज, रोजगार की भाषा के रूप में मान्यता मिले, हिन्दी का स्वर्णिम भविष्य इस बात भी निर्भर करता है, कि पर्याप्त रूप से राजनैतिक संरक्षण मिले।  संचालन कर रहे वरिष्ठ चिकित्सक, कवि डा० अखिलेश चन्द्र गौड़ ने कहा, "हिन्दी ने आजादी से और आजादी के बाद बहुत संघर्ष झेला है, उसे वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वह हक़दार थी, यद्यपि वर्तमान में हिन्दी ने पर्याप्त उन्नति की है तथापि अभी और विकसित किए जाने की आवश्यकता है । हिन्दी के उज्ज्वल भविष्य के लिए राजनैतिक संरक्षण जितना अपेक्षित है, उससे कहीं ज्यादा आवश्यक है हमारी व्यवहारिक स्वीकार्यता । "आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" ने बहुत सारगर्भित, विषय सापेक्ष वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा, "हिन्दी के उत्थान में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी का अभूतपूर्व योगदान है, उन्होंने कहा कि भाषा का उद्गम आवश्यकता से होता है और ये हिन्दी में बहुत ढंग से हुआ, उन्होंने अफसोस के साथ कहा कि हम हिन्दी की वकालत करते हैं लेकिन अपने निजी जीवन और व्यवहार में पर्याप्त प्रयोग नहीं करते, हिन्दी की रोटी तो खाते हैं, हिन्दी की सांस नहीं लेते, इस तरह से हिन्दी बहुत विकसित नहीं होगी, हिन्दी को जियेंगे, तो हिन्दी बढेगी, हिन्दी बोलने में, लिखने में लापरवाही से नहीं सजगता से काम चलेगा"। अध्यक्षीय उद्वोधन में डा0 सुभाष चन्द्र दीक्षित जी ने कहा, "हिन्दी का कल जो भी रहा, वर्तमान बहुत उन्नतशील है और भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हिन्दी के प्रति हमारी मानसिकता और सोच कैसी रहती है ! "मनोज शर्मा "शलभ", देवेन्द्र शर्मा "भ्रमर" ने भी संक्षेप में अपने विचार प्रस्तुत किए, समापन पर निर्झर की ओर से सचिव अखिलेश सक्सेना ने सभी अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया ।

✴️कासगंज : साहित्यिक , सामाजिक श्री मन मस्त सत्संग मंडल के तत्वाधान में देवी सरस्वती मंदिर आवास विकास कालोनी श्री मनमस्त महाराज सिद्धपीठ श्री मनमस्त आश्रम पर 
परम पूज्य गुरुवर श्री शारदा सिद्ध मनमस्त जी महाराज द्वारा 12 वर्ष अन्न त्याग के पश्चात 2 वर्ष को धारण किए गए मौन व्रत तपस्या का 42 वा वार्षिकोत्सव भक्तजनों द्वारा भजन , कीर्तन , पूजन , अर्चन आदि कर मनाया गया । इस अवसर पर श्रीमती शेलवाला वार्ष्णेय , श्रीमती ज्योति सक्सैना , श्रीमती सुभिद्र सोलंकी , श्रीमती नीलम , श्रीमती तन्नो , श्रीमती पूनम मिश्रा , श्रीमती रोशनी यादव , श्रीमती लक्ष्मी देवी , श्रीमती नीतिज्ञा , कु0 प्रतिज्ञा, श्री मदन मोहन शर्मा , श्री जवाहरलाल अग्रवाल , श्री विजय कुमार , श्री महेंद्र , श्री रवि कृष्णा श्री भविष्य आदि ने श्री मनमस्त महाराज द्वारा किए गए त्याग तपस्या आदि का वर्णन कर , महाराज के सद जीवन से प्रेरणा लेने का आवाह्न किया ।

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संवाददाता / ब्यूरो चीफ भर्ती प्रक्रिया साक्षात्कार हेतु आवेदन 👉 https://bit.ly/35fVFRt

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