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30 अप्रैल 2019

कासगंज : मौत के मंजर में गायें

- योगी सरकार गायों के नाम पर कितना भी पैसा खर्च रही हो लेकिन कासगंज मंडी परिषद की अस्थाई गौशाला में गायों का हाल देकर आप भी दुखी नजर आएंगे,,

 कासगंज के मंडी परिषद में बनी अस्थाई गऊशाला में नया मामला सामने आ रहा है जिसमे प्रशासन की लापरवाही  नजर आ रही है ,, गौशाला में गायों को पर्याप्त चारा न मिलने से वह भूखी और कमजोर हालत में दिख रही हैं ,, आपको बता दें कि यहां पर पड़ोसी निवासी लोगों ने प्रावदा को बताया कि यहां गायों की अनदेखी की जा रही है,, गायों को पीने के लिए गन्दा पानी दिया जा रहा है,, दूसरे तीसरे दिन एक गाय मर जाती है जिसे जेसीबी द्वारा  दफना दिया जाता है।
अगर यहां जेसीबी से खुदाई कराई जाए तो कई कंकाल निकलेंगे।

जब इस बारे में अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो वह बचते नजर आये।
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वाइट- सुरेंद्र सिंह निवासी हनौता

https://youtu.be/-zFeOfKDXZY
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में सरकारी गौशाला में गायों के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। हर रोज गौवंश की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। कासगंज की मंडी समिति गौशाला में पिछले छह महीनों में देखभाल के अभाव में साढ़े चार सौ गयों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन गहरी नींद में सो रहा है।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने किसानों की फसलों को दृष्टिगत रखते हुए आवरा गोवंशों को गोशाला में रक्षित करने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने जिले में छह अस्थाई गौशालाएं बनाई थी। इनसमें आवरा गौवंशों को आनन-फानन में रक्षित किया गया। तमाम समाज सेवियों ने भी गौशालाओं में दान के रूप में प्रशासन को भूसा, चारा के अलावा खाद्य सामग्री मुहैया कराई, ताकि गौवंशों को समय से चारा पानी मिलता रहे। बदलते दौर में प्रशासन गौवंशों को गौशालाओं में कैद कर भूल गया। 

सिर्फ 150 गौवंश बचे

कासगंज की मंडी गौशाला की बात की जायें, तो शुरूआती दौर में छह सौ गौवंश थे, लेकिन इस वक्त मात्र 150 गोवंश है। स्थानीय लोग शिशुपाल और विजय कुमार की मानें तो प्रचंड गर्मी और चारा, पानी के अभाव में हर रोज दो चार गौवंशों की दम तोड़ने की खबर आने लगी हैं। यही कारण है कि पिछले छह माह में छह सौ में से साढ़े चार सौ गौवंश काल के गाल में समा चुके हैं। सरकारी नुमाइंदे जेसीबी से अंतिम संस्कार कराकर अपनी जिम्मेदारी मान रहे हैं। आलम यह है कि जानबूझकर अनजान बने हुए हैं। चारा के स्टाक खत्म हो गया है। दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
क्या कहा एडीएम ने
जब इस मामले में गोवंशो की जिम्मेदारी सभाल रहे अपर जिलाधिकारी योगेन्द्र कुमार कासगंज से बात की गई तो वह पहले छह सौ की बात किया करते थे, लेकिन गौवंशों के मरने के बाद अब साढ़े तीन सौ की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर गौशाला में कोई व्यवस्था नहीं है, तो मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) को भेजकर दिखवाता हूं।

 संतोष राजपूत के साथ कमल कुमार की रिपोर्ट :  एंकर- राधेश्याम यादव

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मासूम की हत्या पर गुस्साए ग्रामीण, दो घंटे नहीं उठने दिया शव

ग्रामीण बोले-पहले करें आरोपितों की गिरफ्तारी एक हिरासत में सिरौली से पांच दिन पूर्व हुआ था लापता खेत में मिला शव ।
गंजडुंडवारा,  पांच दिन से लापता मासूम का शव मिलने से सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। मौके पर पहुंची पुलिस के समक्ष ग्रामीणों ने आरोपितों को गिरफ्तार करने की शर्त रख दी। दो घंटे बाद ग्रामीणों को समझा-बुझा कर पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। वहीं एक आरोपित को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। एसपी ने भी मौके पर पहुंच कर घटना की जानकारी ली।
गांव सिरौला निवासी सुनील का पांच वर्षीय पुत्र सोनू 24 अप्रैल की शाम पांच बजे गायब हो गया था। परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन कहीं पता नहीं लगा। थाने में गुमशुदगी भी दर्ज कराई। रविवार को गांव के ही चार लोगों पर शक होने पर परिजनों ने शाम को थाने में खबर दी। सोमवार सुबह नौ बजे करीब गांव से सौ मीटर दूर शिवाला के खेत में ग्रामीणों ने एक क्षत विक्षत शव पड़ा देखा। मौके पर पहुंचे सोनू के परिजनों ने शर्ट से बेटे की शिनाख्त की। इसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश भड़क गया। खबर मिलने पर एसओ विनोद कुमार भी फोर्स के साथ पहुंच गए, लेकिन ग्रामीण पहले हत्यारोपितों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे। उन्होंने कहा इसके बाद ही शव उठाने देंगे। सीओ गवेंद्र पाल गौतम के समझाने पर दो घंटे बाद ग्रामीण राजी हुए। इधर पुलिस ने एक आरोपित मुवीन को भी हिरासत में ले लिया है। दोपहर में एसपी अशोक कुमार शुक्ल ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।

'पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित अकरम है, हत्या की असली वजह उसके हिरासत में आने पर ही पता चलेगी। पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं, जल्द ही अन्य आरोपित हिरासत में होंगे।'

रिपोर्टर बिपिन कुमार यादव

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वोटिंग के दौरान उंगली पर लगाई जाने बाली स्याही आखिर छूटती क्यों नहीं

मतदान के दौरान उंगली पर लगाई जाने बाली अमिट स्याही सिल्वर नाइट्रेट में घुली डाई होती है। सिल्वर नाइट्रेट रंगहीन विलियन है। इसमें डाई मिलाई जातीहै। उंगली पर लगने के बाद सिल्वर नाइट्रेट त्वचा से निकलने वाले पसीने में मौजूद सोडियम क्लोराइड (नमक) से क्रिया करके सिल्वर क्लोराइड बनाता है। धूप के संपर्क में आने पर यह सिल्वर क्लोराइड टूटकर धात्विक सिल्वर में बदल जाता है। धात्विक सिल्वर पानी या वाॅर्निश में घुलनशील नहीं होता इसलिए इसे उंगली से आसानी से साफ नहीं किया जा सकता।

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