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प्रधानमंत्री बीमा सखी योजना में भर्ती प्रारंभ

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काव्य- संध्या कार्यक्रम बी ० एस० डायनामिक एकेडमी, कासगंज के सभागार में भव्यता से हुआ सम्पन्न ।


श्रीमती वीना सक्सेना एवं अमित सक्सेना की स्मृति में आयोजित हुई काव्य- संध्या
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कार्यक्रम बी ० एस० डायनामिक एकेडमी, पंखा वाला बाग, कासगंज के सभागार में भव्यता से हुआ सम्मान*
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काव्य- संध्या में कवियों एवं अनेक प्रबुद्ध जनों को स्मृति चिन्ह एवं शाल ओढाकर कर, किया गया सम्मानित
कासगंज (15 अप्रैल), गत दिवस  नगर के प्रमुख शिक्षण संस्थान बी एस डायनामिक, एकेडमी, पंखा वाला बाग कासगंज में, एक भव्य काव्य- संध्या एवं सम्मान समारोह का आयोजन नगर के वरिष्ठ कवि सुरेश चन्द्र सक्सेना के संयोजकत्व मेंअपनी पत्नी श्री मती वीना सक्सेना एवं पुत्र अमित सक्सेना की स्मृति में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ एवं कवि डा० अखिलेश चन्द्र गौड़ ने की, वहीं मुख्य अतिथि के रूप में नगर के वरिष्ठ समाजसेवी, चिकित्सक एवं कवि हृदय डा० सुरेन्द्र गुप्ता तथा विशिष्ट अतिथि   सीएमएस डा० संजीव सक्सेना, पूर्व सचिव मण्डी समिति अशोक कुमार सिंह सोलंकी, तथा प्रोफेसर डा० गिरजेश सक्सेना, इटावा से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में पूर्व प्राचार्य ओ पी सिंह, मधुर पुंढीर, डा० संजय सक्सेना, देवेन्द्र सिंह, संजय सक्सेना, बरेली, डा० उमाकांत , के.के.सक्सेना, जिलाध्यक्ष (अखिल भारतीय कायस्थ महासभा), आदि उपस्थित रहे। 
     कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर माँ सरस्वती को माल्यार्पण किया गया, वहीं संयोजक सुरेश चन्द्र सक्सेना एवं उनके परिवारजनों द्वारा श्रीमती वीना सक्सेना एवं अमित सक्सेना के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई! 
     कार्यक्रम का शुभारंभ डा० सुरेन्द्र गुप्ता की सरस्वती वंदना, " माँ शारदे संवेदना के सिन्धु का वर दीजिये... "के साथ हुआ। इसी क्रम में डा० उमाकांत ने अपनी भावपूर्ण कविता, "हे जीवन के साथी तुमको, स्नेह तुम्हारा भेजूं कैसे" सुनाकर भावविभोर कर दिया! तदोपरांत कार्यक्रम के संचालक अखिलेश सक्सेना ने मार्मिक रचना प्रस्तुत की, "उस पिता की बेबसी का अंत क्या? जिसने खो दिया हो, अपना इकलौता जवां बेटा, और सम्बल के लिए पत्नी भी न हो, उसके साथ! " मनोज मंजुल ने पढ़ा, "श्री सुरेश पुत्र अमित सक्सेना को, मैं काव्यात्मक श्रद्धांजलि देता हूँ... श्रद्धेया वीना सक्सेना जी को भाव- पुष्पांजलि देता हूँ"कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा० अखिलेश चन्द्र गौड़ ने अनेक रचनाएँ पढीं,उनकी जिंदगी शीर्षक की रचना, " बड़ी हिफाज़त से रखी, बिखर गई जिंदगी " को श्रोताओं की पर्याप्त सराहना मिली। कार्यक्रम संयोजक सुरेश चन्द्र सक्सेना की रचना ने तो जैसे सबको भावुक ही कर दिया हो, "तुम क्या गए, जिंदगी का चैनों- अमन ले गए"। मंचासीन अतिथियों ने भी अपने भावपूर्ण उद्गार व्यक्त किए। कार्यक्रम में आरती सक्सेना, अर्चना सक्सेना, अतुल सक्सेना, चन्द्र प्रकाश शर्मा, अतुल पाटकर, सतीश चन्द्र माहेश्वरी, नवीन चौहान, रंजना सक्सेना, कमलेश, रोहिताश्व कुमार, सक्षम सूर्यांश, इशिता माही, रिंकी चौहान, राधा रानी, क्षमा सक्सेना, दीपिका सक्सेना, आयुष सक्सेना, सहित बड़ी संख्या में श्रोता गण उपस्थित रहे, कार्यक्रम उपरांत सराहनीय भोजन व्यवस्था रही। संयोजक सुरेश चन्द्र सक्सेना ने सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त कर, धन्यवाद ज्ञापित किया।

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